बुधवार, 19 मई 2021

ध्यान और सिद्धि...💐

आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग सिद्धियों से होकर गुजरता है। लेकिन कई लोगों के मन में यह गलत धारणा होती है कि अध्यात्म मलतब सिद्धियां प्राप्त करना है। इस तरह के विचारधारा के लोगों को लगता है कि सिद्धियों के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति एकाग्रता के साथ ध्यान में बैठता है, दृढ़ होकर अलग अलग मत्रों का जाप करता है, त्राटक, यज्ञ हवन आदि करता है। साधारण इंसान जब ऐसे व्यक्ति को अनेकों कर्मकांड करते देखता है तो वह उसे बहुत आध्यात्मिक व्यक्ति समझता है।

बाहर से ऐसे लोग घोर आध्यात्मिक दिखाई देते हैं लेकिन अंदर ही अंदर अहंकार पल रहा होता है। उनकी आंतरिक भावना यही होती है कि आज तक जिन लोगों ने मेरी तरफ ध्यान नहीं दिया उन सबको अब सिद्धियों के द्वारा अपना मूल्य दिखा सकता हूँ। यह सोच केवल अंहकार प्रतिबिंबित करता है। सिद्धियों के मार्ग पर चलते हुए ऐसी सोच रखना असली अध्यात्मिकता नहीं है।

आज के सामाजिक ढांचे में लोग बाहरी वेशभूषा और दिखावे के आधार पर तय करते हैं कि सामने वाला व्यक्ति आध्यात्मिक है या नहीं। किंतु यह आध्यात्मिकता का गलत आधार है।

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