रविवार, 3 मई 2026

अधूरी कहानी 💕

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कुछ प्रेम कहानियाँ गलतियों से नहीं टूटतीं, वे बस समय, परिस्थितियों और अधूरे भाग्य के बीच कहीं खो जाती हैं। मेरा प्रेम भी वैसा ही था। न उसने धोखा दिया, न मैंने बेवफाई की। फिर भी हमारे बीच एक ऐसी दूरी आ गई, जिसे कोई शब्द, कोई प्रतीक्षा, कोई आँसू मिटा नहीं सके। कभी-कभी मैं सोचता हूँ अगर गलती किसी की होती, तो शायद शिकायत करके दिल हल्का कर लेता। लेकिन यहाँ तो दोषी कोई नहीं था। बस हालात हमसे ज्यादा मजबूत निकले। उसकी याद आज भी मेरे दिनों में चुपचाप उतर आती है। कोई गीत सुनता हूँ, तो उसकी आवाज़ महसूस होती है। भीड़ में भी एक खालीपन मेरे साथ चलता है। ऐसा लगता है जैसे दिल का कोई हिस्सा उसी के पास रह गया हो। सबसे ज्यादा दर्द इस बात का नहीं कि वह अब मेरे साथ नहीं है, दर्द इस बात का है कि हम दोनों शायद साथ रहना चाहते थे, लेकिन जिंदगी ने हमें साथ रहने का अधिकार ही नहीं दिया। मैं उसे आज भी बुरा नहीं कह सकता। उसकी मासूमियत, उसकी मजबूरियाँ, उसका मौन, सब समझ आता है। और शायद यही समझ सबसे ज्यादा तकलीफ देती है। क्योंकि जब प्रेम में कोई अपराधी नहीं होता, तब सजा दोनों को उम्र भर मिलती है। अब मैं मुस्कुरा तो लेता हूँ, लोगों से बातें भी कर लेता हूँ, लेकिन भीतर कहीं एक टूटा हुआ कोना हमेशा चुप रहता है। वह प्रेम अधूरा जरूर रह गया, लेकिन झूठा कभी नहीं था।

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शनिवार, 2 मई 2026

कहीं तुम आस पास ही हो 💕

तुमसे बिछड़ने के बाद समझ आया कि दर्द भी आवाज़ करता है…बस उसे सुनने वाला कोई नहीं होता। जब मैं खुद में होता हूँ, तो एक अजीब खालीपन मेरे भीतर गूंजता है क्योंकि अब वहाँ तुम नहीं हो। पहले मेरा “मैं” तुम्हारे होने से पूरा था, अब वही “मैं” अधूरा, टूटा और बिखरा हुआ है।
उस तालाब के किनारे अब भी जाता हूँ…नीम और पीपल की छाँव में बैठता हूँ, पर अब वो छाँव सुकून नहीं देती बस तुम्हारी कमी और गहरी कर देती है। मिट्टी की खुशबू भी अब चुभती है, क्योंकि उसमें तुम्हारी यादें घुली हैं, और हर याद एक टीस बनकर दिल में उतर जाती है। 

गाँव की गलियाँ…
जहाँ कभी तुम्हारे साथ हँसते हुए चला था, आज वहीं से गुजरता हूँ तो लगता है जैसे हर दीवार मुझसे पूछ रही हो-वो कहाँ है…? गौरैया अब भी चहकती है, बारिश अब भी होती है, पर मेरे लिए हर आवाज़ अब एक सन्नाटा है।
क्योंकि जो सुनना चाहता था, वो अब कभी सुनाई नहीं देगा। तुम्हारा जाना एक घटना नहीं था, वो मेरे अंदर कुछ टूटने की शुरुआत थी जो अब तक हर रोज़ थोड़ा-थोड़ा टूटता ही जा रहा है। तुम शायद अब आगे बढ़ गई हो…
पर मैं आज भी वहीं खड़ा हूँ, उस आखिरी मोड़ पर, जहाँ हमारा हाथ छूटा था। मैं जी रहा हूँ…पर सच कहूँ तो, सिर्फ सांसें ले रहा हूँ
जिंदगी तो तुम्हारे साथ ही चली गई।

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अब तुम साथ नहीं हो 💕

अब तुम साथ नहीं हो… पर अजीब बात है, तुम्हारे जाने के बाद भी तुम गई नहीं। जब मैं खुद में होता हूँ, तब भी तुम्हारे होने से ही होता हूँ। उस तालाब के किनारे आज भी जाता हूँ कभी-कभी…नीम और पीपल की वही छाँव है, पर अब वहाँ सन्नाटा बैठा रहता है। मिट्टी की वही सोंधी खुशबू उठती है, मगर अब उसमें तुम्हारी हँसी नहीं घुलती, बस एक अधूरी याद रह जाती है। गाँव की गलियाँ अब भी वैसी ही हैं, पर उनमें तुम्हारे कदमों की आहट नहीं गूँजती। हर मोड़ पर आँखें तुम्हें ढूँढती हैं, और दिल चुपचाप समझा लेता है कि कुछ लोग अब सिर्फ यादों में ही मिलते हैं।
प्रकृति अब भी गाती है, कोयल भी कूकती है, बारिश भी होती है, पर अब वो गीत अधूरे लगते हैं, जैसे सुर तो हैं पर तुम नहीं। हवा जब गुजरती है, तो लगता है जैसे तुम्हारा नाम लेकर छू गई हो…और मैं बस उसी एहसास में ठहर जाता हूँ। तुमसे बिछड़ना शायद दूरी नहीं, एक खामोश साथ है, जहाँ तुम नहीं हो, फिर भी हर जगह हो। मैं अब भी वही हूँ…बस फर्क इतना है कि पहले तुम्हारे साथ जीता था, अब तुम्हारी यादों के साथ जी रहा हूँ।

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भाई की शादी 💕

आज बहुत समय बाद मौसी के गांव मल्लिन आया हूं। आज पूर्णिमा है, और मैं छत में चादर बिछाकर सोया हूं। पूर्णिमा का चांद ... अपने पूरे शबाब पर है। चारों तरफ दूधिया रोशनी फैली हुई है। गांव का स्वच्छ वातावरण, खुला आसमान, कुएं का ताजा मीठा पानी, घर के पीछे हरी ताजी सब्जियों की बाड़ी, दूर तक हरे भरे फसलों से लहकते खेत, मिट्टी का प्यारा सा घर, सिर पर घूंघट डाले महिलाएं, परंपराएं, वो बचपन में जिए हुए संस्कृति की महक ...कहने को बहुत कुछ है, लेकिन सुनने को अब वो नहीं है... वो याद आ जाती है जब गांव आता हूं। 

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रविवार, 15 फ़रवरी 2026

स्वयं का बोध 💐💐💐

स्वयं का बोध: -
जीवन बाहरी उपलब्धियों की दौड़ नहीं, बल्कि अपने अंतर्मन की खोज है। हम अक्सर दुनिया के शोर में खो जाते हैं, जबकि असली सत्य हमारे भीतर के सन्नाटे और शून्य में छिपा है। खुद को जानना ही सबसे बड़ा ज्ञान है।

परिवर्तन और संघर्ष: -
संसार का नियम बदलाव है। दुख और चुनौतियाँ हमें तोड़ने के लिए नहीं, बल्कि हमारे अहंकार को मिटाकर हमें माँजने के लिए आती हैं। जैसे आग सोने को शुद्ध करती है, संघर्ष हमारी चेतना को जगाता है।

वर्तमान ही सत्य: -
बीता हुआ कल एक स्मृति है और आने वाला कल एक भ्रम। सत्य केवल 'अभी' के इस पल में है। जीवन को सुलझाने की कोशिश छोड़कर, उसे पूरी जीवंतता के साथ महसूस करना ही सच्ची मुक्ति और आनंद है।

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मेरे बच्चों का ध्यान रखियेगा...💐💐💐

मेरी पत्नी और दोनों बेटियां भी बांधवगढ़ गए हैं। उनका ख्याल रखिएगा साहब। बांधवगढ़ की पावन और सुरम्य स्थल से आपका लाइव वीडियो देखा, मजा आ गया। मैं स्वास्थ्यगत कारणों से वहां नहीं पहुंच पाया, लेकिन मेरा ध्यान वहीं लगा हुआ है।

अब तो AI का दौर है, वो तो भावनाओं को भी एक्सप्रेस कर देता है, जो चाहो लिख देता है। लेकिन मेरी भावनाओं को वो नहीं लिख पाता, कुछ न कुछ तो कमी रह ही जाती है। मैं जीवंत हूं और वो मशीन, अंतर तो रहता ही है।

आज नींद नहीं आएगी। जब भी आपको सुनता हूं, नींद उड़ जाती है, धड़कनें तेज हो जाती हैं, सांसे थम जाती हैं। वो जो आपके चरणों के प्रति थोड़ा सा प्रेम है न वो मुझे कभी ठीक से सोने नहीं देती।

बस यूं ही... आज आपको निहारने का मन हो रहा है। आपके चरणों में सप्रेम साहेब बंदगी।

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तुम पढ़ो तो कोई बात बने... 💐💐💐

मेरे लिखने से क्या
तुम पढ़ो तो कोई बात बने।

मेरे सोचने से क्या,
तुम समझो तो कोई बात बने।

मै चुप हूं तो क्या,
तुम बोलो तो कोई बात बने।

मेरे चाहने से क्या,
तुम अहसास करो तो कोई बात बने।

मैं बेरंग हूं तो क्या,
तुम रंग भरो तो कोई बात बने।

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विरक्ति का मौन स्पर्श...💐💐💐

जीवन के किसी मोड़ पर ऐसा समय आता है जब मन थक जाता है। वही दिन, वही लोग, वही इच्छाएँ... समय के साथ सब कुछ होते हुए भी भीतर कुछ खाली सा लगता है। यह खालीपन केवल दुख नहीं होता, यह उस अनुभूति का संकेत है कि संसार का आकर्षण अब उतना स्थायी नहीं रहा जितना कभी प्रतीत होता था। धीरे धीरे मन प्रश्न करने लगता है कि क्या यह दौड़ अंतहीन है? क्या सुख सचमुच बाहरी वस्तुओं में है? जब इन प्रश्नों का स्पष्ट उत्तर नहीं मिलता, तब भीतर एक सूक्ष्म विरक्ति जन्म लेती है।

उदासी कभी कभी आत्मा का संकेत होती है कि वह कुछ और खोज रही है। कुछ स्थायी, कुछ गहरा। संसार की अस्थिरता को देखकर मन समझने लगता है कि यहाँ सब परिवर्तनशील है। जो आज अपना है, कल पराया हो सकता है। जो आज प्रिय है, वह भी एक दिन स्मृति बन सकता है। इस सत्य का बोध मन को हल्का भी करता है और गंभीर भी।

विरक्ति का अर्थ यह नहीं कि जीवन से भाग जाएँ। बल्कि इसका अर्थ है जीवन को समझकर जीना। प्रेम करते हुए भी अपेक्षा कम करना। सफलता मिले तो विनम्र रहना, असफलता आए तो स्थिर रहना। जब मन संसार के कोलाहल से हटकर मौन की ओर बढ़ता है, तब वह अपने भीतर एक शांत प्रकाश अनुभव करता है। वही प्रकाश उसे बताता है कि वास्तविक शांति बाहरी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि भीतर की स्थिरता में है।

इस प्रकार उदासी और विरक्ति जीवन की पराजय नहीं, बल्कि एक गहरी समझ का प्रारंभ है जहाँ मन संसार में रहते हुए भी उससे बँधा नहीं रहता।

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मंगलवार, 20 जनवरी 2026

चादर तिलक (23 जनवरी 2026)

साहब कबीर की परंपरा में गुरु केवल मार्गदर्शक नहीं होते, वे साधना, मर्यादा और चेतना की अखंड परंपरा के संवाहक होते हैं। चादर तिलक का यह अवसर इसी पवित्र गुरु परंपरा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण, ऐतिहासिक, मंगलमय और पावन क्षण है। इस अवसर पर पंथ श्री प्रकाश मुनि नाम साहब, निःशब्द रूप से धर्मदास साहब एवं आमीन माता साहब की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, उसे  पंथ श्री उदितमुनि नाम साहब एवं पंथ श्री प्रखर प्रताप साहब नाम साहब को सौंपेंगे।

गुरु और शिष्य के बीच घटित यह क्षण आत्मा से आत्मा का संवाद होता है, जहाँ कहा कुछ नहीं जाता, फिर भी सब कुछ संप्रेषित हो जाता है। धर्मदास साहब और आमीन माता साहब की परंपरा का मूल भाव ही निःशब्द साधना और भक्ति का समन्वय है। यहाँ सत्य को व्यक्त नहीं किया जाता, बल्कि जीया जाता है।

जब पंथ श्री प्रकाश मुनि नाम साहब के माध्यम से यह परंपरा पंथ श्री उदितमुनि नाम साहब और पंथ श्री प्रखर प्रताप साहब को सौंपी जाएगी, तब वह केवल एक विधि नहीं होगी, बल्कि नाम परंपरा की अखंड धारा का निःशब्द प्रवाह होगा।

साहब के असंख्य अनुयायियों के बीच, जिनकी आँखों में भक्ति की नमी है, हृदयों में प्रेम की कोमलता है और साँसों में साहब का नाम, उन सबके बीच मैं भी अपने पूरे परिवार के साथ भीगी पलकों, थरथराती भावनावों के साथ उस दिव्य पल का साक्षी बनूँगा।

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अधूरी कहानी 💕

💕 कुछ प्रेम कहानियाँ गलतियों से नहीं टूटतीं, वे बस समय, परिस्थितियों और अधूरे भाग्य के बीच कहीं खो जाती हैं। मेरा प्रेम भी वैसा ही था। न उस...