शनिवार, 23 फ़रवरी 2019

ज्ञान का दिखावा...💐

जानता हूँ दोस्त आपके पास ज्ञान का अकूत भंडार है, लेकिन क्या करें आपका दिव्य ज्ञान हमको बिल्कुल भी समझ नहीं आता। लोक परलोक की भाषा और बातें जरा भी समझ में नहीं आती। जरा जमीन पर उतरकर बात करो, जरा हिंदी में समझाओ।

अपने दिव्य ज्ञान में जिंदगी की चार बूंदे घोल लो, तबियत से उन्हें जी लो। तब ज्ञान का पिटारा खोलो, तब हृदय की बात कहो। यकीन मानिए सबको अच्छा लगेगा, सबको मीठा लगेगा।



स्वयं का बोध 💐💐💐

स्वयं का बोध: - जीवन बाहरी उपलब्धियों की दौड़ नहीं, बल्कि अपने अंतर्मन की खोज है। हम अक्सर दुनिया के शोर में खो जाते हैं, जबकि असली सत्य हमा...