चाहतों के बादल बरसने लगे हैं, कामनाओं की झड़ी लगी हुई है। इन्हें सही दिशा दे लूँ, सुरति को संवार लूँ, नाम के चादर में अस्तित्व ढंक लूँ, समा लूँ। जी चाहता है विराम लूँ।
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जीवन क्या है... यह प्रश्न जितना पुराना है, उतना ही नया भी। मनुष्य जन्म लेता है, बढ़ता है, सपने देखता है, प्रेम करता है, संघर्ष क...