साहब कबीर की परंपरा में गुरु केवल मार्गदर्शक नहीं होते, वे साधना, मर्यादा और चेतना की अखंड परंपरा के संवाहक होते हैं। चादर तिलक का यह अवसर इसी पवित्र गुरु परंपरा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण, ऐतिहासिक, मंगलमय और पावन क्षण है। इस अवसर पर पंथ श्री प्रकाश मुनि नाम साहब, निःशब्द रूप से धर्मदास साहब एवं आमीन माता साहब की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, उसे पंथ श्री उदितमुनि नाम साहब एवं पंथ श्री प्रखर प्रताप साहब नाम साहब को सौंपेंगे।
गुरु और शिष्य के बीच घटित यह क्षण आत्मा से आत्मा का संवाद होता है, जहाँ कहा कुछ नहीं जाता, फिर भी सब कुछ संप्रेषित हो जाता है। धर्मदास साहब और आमीन माता साहब की परंपरा का मूल भाव ही निःशब्द साधना और भक्ति का समन्वय है। यहाँ सत्य को व्यक्त नहीं किया जाता, बल्कि जीया जाता है।
जब पंथ श्री प्रकाश मुनि नाम साहब के माध्यम से यह परंपरा पंथ श्री उदितमुनि नाम साहब और पंथ श्री प्रखर प्रताप साहब को सौंपी जाएगी, तब वह केवल एक विधि नहीं होगी, बल्कि नाम परंपरा की अखंड धारा का निःशब्द प्रवाह होगा।
साहब के असंख्य अनुयायियों के बीच, जिनकी आँखों में भक्ति की नमी है, हृदयों में प्रेम की कोमलता है और साँसों में साहब का नाम, उन सबके बीच मैं भी अपने पूरे परिवार के साथ भीगी पलकों, थरथराती भावनावों के साथ उस दिव्य पल का साक्षी बनूँगा।
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