बुधवार, 21 सितंबर 2022

साहब के प्रति कर्तव्य ...💐

कोई कुछ भी करे हमारा क्या जाता है? साहब ने भरा पूरा परिवार दिया है, रोजी रोटी की व्यवस्था की है, सिर छुपाने लायक घर दिया है। कोई मुर्गा खाए, कोई बकरा खाए, कोई दारू पीकर गटर में पड़ा रहे, कोई निंदनीय या आपराधिक कृत्य करे, कोई घपला या भरष्टाचार करे। हमारा क्या जाता है? जब दामाखेड़ा जाएँ दो वक्त का भरपेट भोजन प्रसाद मिल जाए। इससे ज्यादा भला और क्या चाहिए?

मुझे कहीं कोई बुराई दिखती है, कमी दिखती है तो लिख पड़ता हूँ की शायद सार्थक चर्चा हो, इन बुराइयों से बचने का मार्ग मिले, उपाय मिले तथा हम जागरूक होकर निर्विघ्न और बिना भरम के निष्कंटक साहब के मार्ग पर चलें, उन तक पहुंचें भी और उनकी दर्शन बंदगी भी हो।

आज किसी ने मेरे एक पोस्ट पर मुझे मारने की धमकी दी। लेकिन मैं लिखना जारी रखूंगा। मन के हर विचारों को लिखूंगा- गुस्सा भी, प्रेम भी। मैं भी अगर यह सोचकर बैठ गया कि "कोई कुछ भी करे, मेरा क्या जाता है" तो कौन मिटाएगा बुराइयों को, कौन दिखाएगा बुराइयों को। आखिर मेरी भी आने वाली पीढ़ी, मेरे बच्चे उसी रास्ते आगे बढ़ेगें, जिस रास्ते मैं चल रहा हूँ। वो रास्ता साहब तक पहुंचने का मार्ग है। हमें उस रास्ते को सरल, सुगम, साफ सुथरा और हरा भरा बनाना है।

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वैराग्य ...💐

जब किसी कारण या संसार के नश्वर सत्य का बोध होने से घर परिवार, समाज, विषय विकारों आदि से व्यक्ति का मोह भंग हो जाता तो वैराग्य पैदा होता है। यह एक तरह से विरक्ति है, इस विरक्ति में चाहनाओं से दिल टूट जाता है फिर वह साहब को हृदय की गहराई से पुकारता है। सुमिरन, ध्यान और भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़कर साहब को शरणागत हो जाता है।

साधना काल 💕

सन 2007 की बात है, नवरात्रि चल रही थी। मैने किसी से सुना था की नवरात्रि में साधक की मनोकामनाएं पूर्ण होती है, साधनाएं सफल होती है। मैने सोचा...