गुरुवार, 15 अगस्त 2019

... छोड़ दो💐

पिताजी कहते हैं सुबह चार बजे बिस्तर छोड़ दो, घरवाली कहती है घर मे रुपए छोड़ दो, दोस्त लोग कहते हैं गर्ल फ्रेंड छोड़ दो, स्नेही लोग कहते हैं चाय छोड़ दो, संत लोग कहते हैं लोभ मोह माया छोड़ दो...!

कुछ छोड़ने की जरूरत ही क्यों है यार। घोर कलयुग में पैदा हुआ हूँ, मैं तो कहता हूं सबकुछ पा लो। धन पा लो, पद पा लो, लोभ मोह माया के साथ मुक्ति भी पा लो।

एक ही अवसर है, एक ही जीवन है। राह में जो सरलता और सहजता से मिले स्वीकार कर लो।

चादर तिलक (23 जनवरी 2026)

साहब कबीर की परंपरा में गुरु केवल मार्गदर्शक नहीं होते, वे साधना, मर्यादा और चेतना की अखंड परंपरा के संवाहक होते हैं। चादर तिलक का यह अवसर इ...