अब तो AI का दौर है, वो तो भावनाओं को भी एक्सप्रेस कर देता है, जो चाहो लिख देता है। लेकिन मेरी भावनाओं को वो नहीं लिख पाता, कुछ न कुछ तो कमी रह ही जाती है। मैं जीवंत हूं और वो मशीन, अंतर तो रहता ही है।
आज नींद नहीं आएगी। जब भी आपको सुनता हूं, नींद उड़ जाती है, धड़कनें तेज हो जाती हैं, सांसे थम जाती हैं। वो जो आपके चरणों के प्रति थोड़ा सा प्रेम है न वो मुझे कभी ठीक से सोने नहीं देती।
बस यूं ही... आज आपको निहारने का मन हो रहा है। आपके चरणों में सप्रेम साहेब बंदगी।
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