रविवार, 15 फ़रवरी 2026

विरक्ति का मौन स्पर्श...💐💐💐

जीवन के किसी मोड़ पर ऐसा समय आता है जब मन थक जाता है। वही दिन, वही लोग, वही इच्छाएँ... समय के साथ सब कुछ होते हुए भी भीतर कुछ खाली सा लगता है। यह खालीपन केवल दुख नहीं होता, यह उस अनुभूति का संकेत है कि संसार का आकर्षण अब उतना स्थायी नहीं रहा जितना कभी प्रतीत होता था। धीरे धीरे मन प्रश्न करने लगता है कि क्या यह दौड़ अंतहीन है? क्या सुख सचमुच बाहरी वस्तुओं में है? जब इन प्रश्नों का स्पष्ट उत्तर नहीं मिलता, तब भीतर एक सूक्ष्म विरक्ति जन्म लेती है।

उदासी कभी कभी आत्मा का संकेत होती है कि वह कुछ और खोज रही है। कुछ स्थायी, कुछ गहरा। संसार की अस्थिरता को देखकर मन समझने लगता है कि यहाँ सब परिवर्तनशील है। जो आज अपना है, कल पराया हो सकता है। जो आज प्रिय है, वह भी एक दिन स्मृति बन सकता है। इस सत्य का बोध मन को हल्का भी करता है और गंभीर भी।

विरक्ति का अर्थ यह नहीं कि जीवन से भाग जाएँ। बल्कि इसका अर्थ है जीवन को समझकर जीना। प्रेम करते हुए भी अपेक्षा कम करना। सफलता मिले तो विनम्र रहना, असफलता आए तो स्थिर रहना। जब मन संसार के कोलाहल से हटकर मौन की ओर बढ़ता है, तब वह अपने भीतर एक शांत प्रकाश अनुभव करता है। वही प्रकाश उसे बताता है कि वास्तविक शांति बाहरी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि भीतर की स्थिरता में है।

इस प्रकार उदासी और विरक्ति जीवन की पराजय नहीं, बल्कि एक गहरी समझ का प्रारंभ है जहाँ मन संसार में रहते हुए भी उससे बँधा नहीं रहता।

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