तुम पढ़ो तो कोई बात बने।
मेरे सोचने से क्या,
तुम समझो तो कोई बात बने।
मै चुप हूं तो क्या,
तुम बोलो तो कोई बात बने।
मेरे चाहने से क्या,
तुम अहसास करो तो कोई बात बने।
मैं बेरंग हूं तो क्या,
तुम रंग भरो तो कोई बात बने।
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स्वयं का बोध: - जीवन बाहरी उपलब्धियों की दौड़ नहीं, बल्कि अपने अंतर्मन की खोज है। हम अक्सर दुनिया के शोर में खो जाते हैं, जबकि असली सत्य हमा...
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