शनिवार, 2 मई 2026

कहीं तुम आस पास ही हो 💕

तुमसे बिछड़ने के बाद समझ आया कि दर्द भी आवाज़ करता है…बस उसे सुनने वाला कोई नहीं होता। जब मैं खुद में होता हूँ, तो एक अजीब खालीपन मेरे भीतर गूंजता है क्योंकि अब वहाँ तुम नहीं हो। पहले मेरा “मैं” तुम्हारे होने से पूरा था, अब वही “मैं” अधूरा, टूटा और बिखरा हुआ है।
उस तालाब के किनारे अब भी जाता हूँ…नीम और पीपल की छाँव में बैठता हूँ, पर अब वो छाँव सुकून नहीं देती बस तुम्हारी कमी और गहरी कर देती है। मिट्टी की खुशबू भी अब चुभती है, क्योंकि उसमें तुम्हारी यादें घुली हैं, और हर याद एक टीस बनकर दिल में उतर जाती है। 

गाँव की गलियाँ…
जहाँ कभी तुम्हारे साथ हँसते हुए चला था, आज वहीं से गुजरता हूँ तो लगता है जैसे हर दीवार मुझसे पूछ रही हो-वो कहाँ है…? गौरैया अब भी चहकती है, बारिश अब भी होती है, पर मेरे लिए हर आवाज़ अब एक सन्नाटा है।
क्योंकि जो सुनना चाहता था, वो अब कभी सुनाई नहीं देगा। तुम्हारा जाना एक घटना नहीं था, वो मेरे अंदर कुछ टूटने की शुरुआत थी जो अब तक हर रोज़ थोड़ा-थोड़ा टूटता ही जा रहा है। तुम शायद अब आगे बढ़ गई हो…
पर मैं आज भी वहीं खड़ा हूँ, उस आखिरी मोड़ पर, जहाँ हमारा हाथ छूटा था। मैं जी रहा हूँ…पर सच कहूँ तो, सिर्फ सांसें ले रहा हूँ
जिंदगी तो तुम्हारे साथ ही चली गई।

💕💕

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