रविवार, 15 फ़रवरी 2026

स्वयं का बोध 💐💐💐

स्वयं का बोध: -
जीवन बाहरी उपलब्धियों की दौड़ नहीं, बल्कि अपने अंतर्मन की खोज है। हम अक्सर दुनिया के शोर में खो जाते हैं, जबकि असली सत्य हमारे भीतर के सन्नाटे और शून्य में छिपा है। खुद को जानना ही सबसे बड़ा ज्ञान है।

परिवर्तन और संघर्ष: -
संसार का नियम बदलाव है। दुख और चुनौतियाँ हमें तोड़ने के लिए नहीं, बल्कि हमारे अहंकार को मिटाकर हमें माँजने के लिए आती हैं। जैसे आग सोने को शुद्ध करती है, संघर्ष हमारी चेतना को जगाता है।

वर्तमान ही सत्य: -
बीता हुआ कल एक स्मृति है और आने वाला कल एक भ्रम। सत्य केवल 'अभी' के इस पल में है। जीवन को सुलझाने की कोशिश छोड़कर, उसे पूरी जीवंतता के साथ महसूस करना ही सच्ची मुक्ति और आनंद है।

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मेरे बच्चों का ध्यान रखियेगा...💐💐💐

मेरी पत्नी और दोनों बेटियां भी बांधवगढ़ गए हैं। उनका ख्याल रखिएगा साहब। बांधवगढ़ की पावन और सुरम्य स्थल से आपका लाइव वीडियो देखा, मजा आ गया। मैं स्वास्थ्यगत कारणों से वहां नहीं पहुंच पाया, लेकिन मेरा ध्यान वहीं लगा हुआ है।

अब तो AI का दौर है, वो तो भावनाओं को भी एक्सप्रेस कर देता है, जो चाहो लिख देता है। लेकिन मेरी भावनाओं को वो नहीं लिख पाता, कुछ न कुछ तो कमी रह ही जाती है। मैं जीवंत हूं और वो मशीन, अंतर तो रहता ही है।

आज नींद नहीं आएगी। जब भी आपको सुनता हूं, नींद उड़ जाती है, धड़कनें तेज हो जाती हैं, सांसे थम जाती हैं। वो जो आपके चरणों के प्रति थोड़ा सा प्रेम है न वो मुझे कभी ठीक से सोने नहीं देती।

बस यूं ही... आज आपको निहारने का मन हो रहा है। आपके चरणों में सप्रेम साहेब बंदगी।

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तुम पढ़ो तो कोई बात बने... 💐💐💐

मेरे लिखने से क्या
तुम पढ़ो तो कोई बात बने।

मेरे सोचने से क्या,
तुम समझो तो कोई बात बने।

मै चुप हूं तो क्या,
तुम बोलो तो कोई बात बने।

मेरे चाहने से क्या,
तुम अहसास करो तो कोई बात बने।

मैं बेरंग हूं तो क्या,
तुम रंग भरो तो कोई बात बने।

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विरक्ति का मौन स्पर्श...💐💐💐

जीवन के किसी मोड़ पर ऐसा समय आता है जब मन थक जाता है। वही दिन, वही लोग, वही इच्छाएँ... समय के साथ सब कुछ होते हुए भी भीतर कुछ खाली सा लगता है। यह खालीपन केवल दुख नहीं होता, यह उस अनुभूति का संकेत है कि संसार का आकर्षण अब उतना स्थायी नहीं रहा जितना कभी प्रतीत होता था। धीरे धीरे मन प्रश्न करने लगता है कि क्या यह दौड़ अंतहीन है? क्या सुख सचमुच बाहरी वस्तुओं में है? जब इन प्रश्नों का स्पष्ट उत्तर नहीं मिलता, तब भीतर एक सूक्ष्म विरक्ति जन्म लेती है।

उदासी कभी कभी आत्मा का संकेत होती है कि वह कुछ और खोज रही है। कुछ स्थायी, कुछ गहरा। संसार की अस्थिरता को देखकर मन समझने लगता है कि यहाँ सब परिवर्तनशील है। जो आज अपना है, कल पराया हो सकता है। जो आज प्रिय है, वह भी एक दिन स्मृति बन सकता है। इस सत्य का बोध मन को हल्का भी करता है और गंभीर भी।

विरक्ति का अर्थ यह नहीं कि जीवन से भाग जाएँ। बल्कि इसका अर्थ है जीवन को समझकर जीना। प्रेम करते हुए भी अपेक्षा कम करना। सफलता मिले तो विनम्र रहना, असफलता आए तो स्थिर रहना। जब मन संसार के कोलाहल से हटकर मौन की ओर बढ़ता है, तब वह अपने भीतर एक शांत प्रकाश अनुभव करता है। वही प्रकाश उसे बताता है कि वास्तविक शांति बाहरी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि भीतर की स्थिरता में है।

इस प्रकार उदासी और विरक्ति जीवन की पराजय नहीं, बल्कि एक गहरी समझ का प्रारंभ है जहाँ मन संसार में रहते हुए भी उससे बँधा नहीं रहता।

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स्वयं का बोध 💐💐💐

स्वयं का बोध: - जीवन बाहरी उपलब्धियों की दौड़ नहीं, बल्कि अपने अंतर्मन की खोज है। हम अक्सर दुनिया के शोर में खो जाते हैं, जबकि असली सत्य हमा...