रविवार, 22 मार्च 2020

साँसों का अंतिम पल...💐

अस्पताल... ऐसी जगह जहाँ एक एक सांस के लिए जूझना पड़ता है। जहाँ व्यक्ति बेबस और लाचार होता है। बड़ी से बड़ी संपत्ति वाला ही क्यों न हो, अस्पताल की चौखट पर उसकी बेहिसाब संपत्ति कम पड़ जाती है। नामी व्यक्ति की सारी कीर्ति फीकी पड़ जाती है, उसका सारा अहंकार मृत्यु के दरवाजे पर नतमस्तक पड़ा होता है।

माता पिता, बंधु सखा और रिश्तेदार दीनहीन भाव से बिलखते रहते हैं। परमात्मा के आगे बिनती करते रहते हैं कि उसके बदले मुझे ले जाओ, लेकिन मेरे उस प्रिय को छोड़ दो। उसकी अभी उम्र ही क्या हुई है जो उसे ले जाने रथ तैयारकर लाए हो? 

प्रकृति का का नियम इतना क्रूर क्यों है? शिकायतें क्यों न करूं? अस्पताल के बिस्तर का नंबर हर बार अलग अलग होता है, चेहरे भी हर बार अलग अलग होते हैं। लेकिन दर्द सबका वही होता है, एक जैसे होता है। मैं अक्सर उन जैसे मासूम चेहरों के लिए भगवान से लड़ पड़ता हूँ, जूझ पड़ता हूँ। जबकि उसका अंजाम जानता हूँ, अच्छे से जानता हूँ।


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